शरणागत वत्सल करणसिंह धांधल
शरणागत वत्सल करणा धांधल
(करणसिंह धांधल)
जोधाजी धांधल का पुत्र करणा धांधल बड़ा वीर और शरणागत वत्सल था। जोधपुर के राव मालदेव के कुंवर उदयसिंह पर किसी कारणवश जब अपने पिता का अनुग्रह कम हुआ तब कुंवर उदयसिंह करणा धांधल के पास कोळूमढ जाकर रहा। करणा धांधल स्वभाव से न झुकने वाला और उदार व दानशील था । उसने चारणो भाटो को बहुत दान दिया, उसकी प्रसिद्धि ज्यादा हुई । जोधपुर का राव मालदेव उस समय हिन्दुस्तान का सबसे शक्तिशाली राजा था। मालदेव के खौफ से सभी भयभीत रहते थे। इसके बावजूद भी कुंवर उदयसिंह
अपने 100 घुड़सवार साथियों सहित कोळूमढ गया तो करणा धांधल ने बड़ी आवभगत कर उनको अपने पास रखा। कुंवर उदयसिंह व उनके साथियों को शरण देकर करणा धांधल ने अपनी शरणागत वत्सलता का परिचय और क्षत्रिय धर्म का पालन किया
करणा तुं कुल दीपतो,
भली करी हद रूप
जोधाणां रा नाथ ने,
नहीं सरणायत सूंप ।। १ ।।
छत्री धरम पाळीयो,
सरणो राख्यो आप
उदैकवरं नै ढाबियो,
मरणो तेवड़ आप ।। २।।
धरां मांही धन हुवो
भुज पकड़ तरवार
कंवर तणो जो भड़ हुवे,
पडीयो माल लुखार ।। ३।।
लाखा कवी कीरत करे,
अमर होय जे बात ।
उदल ने ईम वचन दे
करू जोधाणं रो नाथ ।।४।।
राव मालदेव बड़ा महत्त्वाकांक्षी और अपनी मन मरजी से काम करने का आदि था। अपने पुत्र उदयसिंह को उसकी इच्छा के विरुद्ध शरण देने वाले करणा धांधल पर आक्रमण किया। करणा धांधल इससे भयभीत नहीं हुआ और 700 लोगों से राव मालदेव की सेना से मुकाबला किया। इस युद्ध में दोनों तरफ के लगभग 200 लोग मारे गये ।
(करणसिंह धांधल)
जोधाजी धांधल का पुत्र करणा धांधल बड़ा वीर और शरणागत वत्सल था। जोधपुर के राव मालदेव के कुंवर उदयसिंह पर किसी कारणवश जब अपने पिता का अनुग्रह कम हुआ तब कुंवर उदयसिंह करणा धांधल के पास कोळूमढ जाकर रहा। करणा धांधल स्वभाव से न झुकने वाला और उदार व दानशील था । उसने चारणो भाटो को बहुत दान दिया, उसकी प्रसिद्धि ज्यादा हुई । जोधपुर का राव मालदेव उस समय हिन्दुस्तान का सबसे शक्तिशाली राजा था। मालदेव के खौफ से सभी भयभीत रहते थे। इसके बावजूद भी कुंवर उदयसिंह
अपने 100 घुड़सवार साथियों सहित कोळूमढ गया तो करणा धांधल ने बड़ी आवभगत कर उनको अपने पास रखा। कुंवर उदयसिंह व उनके साथियों को शरण देकर करणा धांधल ने अपनी शरणागत वत्सलता का परिचय और क्षत्रिय धर्म का पालन किया
करणा तुं कुल दीपतो,
भली करी हद रूप
जोधाणां रा नाथ ने,
नहीं सरणायत सूंप ।। १ ।।
छत्री धरम पाळीयो,
सरणो राख्यो आप
उदैकवरं नै ढाबियो,
मरणो तेवड़ आप ।। २।।
धरां मांही धन हुवो
भुज पकड़ तरवार
कंवर तणो जो भड़ हुवे,
पडीयो माल लुखार ।। ३।।
लाखा कवी कीरत करे,
अमर होय जे बात ।
उदल ने ईम वचन दे
करू जोधाणं रो नाथ ।।४।।
राव मालदेव बड़ा महत्त्वाकांक्षी और अपनी मन मरजी से काम करने का आदि था। अपने पुत्र उदयसिंह को उसकी इच्छा के विरुद्ध शरण देने वाले करणा धांधल पर आक्रमण किया। करणा धांधल इससे भयभीत नहीं हुआ और 700 लोगों से राव मालदेव की सेना से मुकाबला किया। इस युद्ध में दोनों तरफ के लगभग 200 लोग मारे गये ।
यह युद्ध संवत् 1617 कार्तिक शुक्ला पूर्णिमा, मंगलवार को हुआ ।
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